बच्चों, बहुत खोजबीन के बाद, अचपन जी ने नन्हा मन पर उड़न तश्तरी उतारने में सफलता पाई ! देखा ? तो.. सी-बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दो !

पढ़ने वाले भैय्या, अँकल जी और आँटी जी,
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
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मेरे लिये कुछ लिख भेजिये, ना ..प्लीज़ !

प्यारे बच्चो , आपको और सभी भारतवासियों को आजादी की हार्दिक बधाई और शुभ-काम्नायें । स्वतंत्रता दिवस पर पढिए देश भक्ति की रचनाएं यहां ......

02 जनवरी 2009

पानी है अनमोल

पानी है अनमोल
आज मै लेकर आई कहानी
इक मेढक की है नादानी
................
................
एक बाग मे था तालाब
सुन्दर सा नही कोई जवाब
तरह तरह के खिले थे फूल
छोटे से तालाब के कूल
वहाँ पे कुछ मेढक रहते थे
जल मे जलक्रीडा करते थे
कभी अन्दर कभी बाहर जाते
सब तालाब मे खूब नहाते

वहाँ पे पूरी मसती करते
नही वो कभी किसी से डरते
सारे ही वहाँ खुश रहते
उसे स्वर्ग सा सुन्दर कहते
मेढक इक उनमे शैतान
बुद्धि मे सबसे नादान
करता वो ऐसी शैतानी
जिससे गन्दा हो जाए पानी
पानी मे कचरा वो फैन्कता
और फिर सबका तमाशा देखता
पत्तो मे जाकर छुप जाता
और उन सबको बडा सताता
सारे मेढक दुखी थे उससे
क्या करे समझे वो जिससे
प्यार से उसको सब समझाते
और पानी का मूल्य बताते

न बर्बाद करो तुम पानी
पानी से मिलती जिन्दगानी
जो तुम इसको गन्दा करोगे
तो फिर जाकर कहाँ रहोगे
जो गन्दा पानी पियोगे
तो बीमारी से मरोगे
साफ स्वच्छ होगा जो यह जल
तभी होगा अपना मन निर्मल
पर मेढक ना समझे बात
सबने मिल सोचा इक रात
नया कोई ढूढेगे ठिकाना
इस मेढक को नही बताना
चुपके से यहाँ से निकलेन्गे
नई जगह पे जाके रहेन्गे
निकले छुप-छुपा के सारे
अब वो मेढक मन मे विचारे

अब तो मै हो गया आज़ाद
करूँगा मै पानी बर्बाद
नही कोई अब उसको रोकेगा
और वो मर्जी से रहेगा
किया तालाब का गन्दा पानी
खुश था करके वो शैतानी
पीता था वही गन्दा पानी
नही थी बात किसी की मानी
इक दिन वो पड गया बीमार
चलने फिरने से लाचार
नही था वहाँ पे कोई स्वच्छ जल
जिससे हो जाता वह निर्मल
अब मेढक को समझ मे आया
सोच सोच के बडा पछताया
जो मै सबकी बात समझता
और पानी न गन्दा करता

तो मै यूँ बीमार न होता
पडा अकेला कभी न रोता
पर न अब कुछ हो सकता था
वो तो बस अब रो सकता था
अपने किए पे पछता रहा था
भूल पे आँसु बहा रहा था
पर ना कोई था उसके पास
बैठ गया वो हो के उदास
नही करूँगा अब शैतानी
और ना करूँगा गन्दा पानी
पानी तो अमृत का घोल
हर बूँद इसकी अनमोल
..................
...................
बच्चो तुमको समझ मे आई
कभी न करना कोई बुराई

कभी न गन्दा करना पानी
यह तो देता है जिन्दगानी

**********************************
Appeal:-
पानी अनमोल है , इसकी हर बूँद कीमती है पानी की बचत हमारा धर्म है
पानी जीवन है , इसकी स्वच्छ्ता और सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है

SAVE WATER

****************************************

3 जन ने कहा है:

Nirmla Kapila ने कहा…

seemaji bahut achha likhti hain aap bdhaai

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

सीमा जी
नमस्कार

बहुत ही नेक विचार हैं आपके
इसके पहले भी मैंने आपकी बच्चों वाली रचना पढ़ी थी
ये बाल गीत तो है ही ,, साथ उद्देश्य प्रधान भी,
आपने कितना सार्थक लिखा है -
"पानी तो अमृत का घोल
हर बूँद इसकी अनामोल
एवं
कभी न गन्दा करना पानी
यह तो देता है जिन्दगानी

आपका
- विजय

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर विचार, हम अभी से बच्चो को यह सब सीखाये तो आज के बच्चे कल के नोजवान है, सो कल वो सब वो करेगे जो आज सीखेगे.
धन्यवाद

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