आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
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आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !


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आपकी सीमा सचदेव

07 January 2009

चूहों के घर बिल्ली आई

प्यारे बच्चो आपको यह तो पता ही है कि चूहे और बिल्ली का जन्म-जन्मांतर का बैर है हमेशा बिल्ली चूहे मार के खाती है ,पर अब देखो जमाना कितना बदल गया है कि बिल्ली मौसी को चूहों के छोटे-छोटे बच्चे कैसे भगाते हैं


चूहों के घर बिल्ली आई

चूहों के घर बिल्ली आई
नये साल के तोहफे लाई
चूहों की इक सभा बुलाई
आ के अपनी बात बताई

नये साल का नियम बनाया
आज से मैंने यह अपनाया
अब मैं तुमको नहीं खाऊँगी
तुम सब के संग मिल के रहूँगी

मेरा तुम से पक्का वादा
मेरे मन में नेक इरादा
तुम भी मौसी को अपना लो
मुझको अपने घर में जगह दो

सुन कर चूहे भी खुश हो गये
सब को अच्छे तोहफे मिल गये
मौसी को सत्कार दे रहे
और वापिस उपहार दे रहे

बिल्ली सोच रही मन ही मन
पाल रहे हैं घर में दुश्मन
पर चूहों के बच्चे छोटे
नन्हे थे, नहीं अकल के मोटे

समझ गये बिल्ली की चाल
आया उनको एक ख्याल
बोले मौसी यहाँ पे आओ
हमें अपनी गोदी में सुलाओ

खुश हो गई बिल्ली सुन कर
आई थी वह यही सोच कर
कि वह सबके पास में जाए
चोरी से बच्चों को खाए

सारे बिल्ली के पास आ गये
और कुछ उसकी पीठ पे चढ़ गये
पकड़ा बिल्ली ने इक बच्चा
खाने लगी थी उसको कच्चा

लगे वे बिल्ली के बाल नोचने
और दाँतों से उसे काटने
देख के बिल्ली भी घबराई
सोचा वहाँ से ले विदाई

सारे तोहफे छोड़ के भागी
चूहों को भी समझ आ गई
दुश्मन पे न करो एतबार
धोखे से वह करता वार

छोड़े बिल्ली बुरे ख्याल
अभी नहीं आया वो साल

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5 जन ने कहा है:

विनय ने कहा…

एक व्यंग काव्य में सब कह दिया, बहुत सुन्दर!

---मेरा पृष्ठ
गुलाबी कोंपलें

बबलू ने कहा…

सुंदर कविता है। मजा आ गया।

ACHARYA RAMESH SACHDEVA ने कहा…

सीमा जी बहुत खूब।
रमेश सचदेव
निदेशक
हरियाणा पबिल्क स्कूल
मण्डी डबवाली

Amit ने कहा…

bahut sundar...maza aa gaya

बवाल ने कहा…

बच्चों के लिए सुन्दर कविता. व्यंग बड़ों के लिए. वाह !

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