बच्चों, बहुत खोजबीन के बाद, अचपन जी ने नन्हा मन पर उड़न तश्तरी उतारने में सफलता पाई ! देखा ? तो.. सी-बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दो !

पढ़ने वाले भैय्या, अँकल जी और आँटी जी,
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
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प्यारे बच्चो , आपको और सभी भारतवासियों को आजादी की हार्दिक बधाई और शुभ-काम्नायें । स्वतंत्रता दिवस पर पढिए देश भक्ति की रचनाएं यहां ......

07 मई 2009

मेहनत का मूल्य

दो जुडवां बहने थीं - प्रतिभा और माया । प्रतिभा बुद्धि सम्पन्न , समझदार , होशियार , कार्य-कुशल और भोली-भाली थी जबकि उसके विपरीत माया चालाक आलसी और कामचोर थी । प्रतिभा पूरी मेहनत से पढाई करती और दूसरों की सहायता करके उसे खुशी मिलती । वह घर में मां के काम में भी उसका हाथ बंटाती और फ़िर पूरा मन लगाकर पढाई करती । अपनी मेहनत से हर प्रश्न का हल ढूंढ्ती और फ़िर उसे बडे ही सुन्दर तरीके से लिखती । उसकी इतनी मेहनत की सब अध्यापक बहुत तारीफ़ करते , वहीं माया कभी ठीक से ग्रह-कार्य भी न करती थी , वह सारा दिन खेलती मस्ती करती और आराम से सो जाती । मां का हाथ बंटाना तो दूर उसके अपने भी छोटे-छोटे कार्य मां को ही निपटाने पडते । प्रतिभा उसको बहुत समझाती लेकिन माया को उसकी बात कभी समझ नही आती । बस परीक्षा के दिनों में प्रतिभा की उत्तर पुस्तिका पढती और परिणाम स्वरूप उससे ज्यादा अंक हासिल कर लेती । उसका परिणाम देखकर सब माया की तारीफ़ करते और उसे मां-पापा से ढेरों उपहार भी मिलते । हर कोई उसकी प्रशंसा करता और मां-पापा की जुबान पर तो एक ही बात रहती कि माया कुशाग्र बुद्धि है । प्रतिभा सारा साल मेहनत करके भी उतने अंक हासिल नहीं कर पाती जितने माया केवल परीक्षा के दिनों में पढकर हासिल करती है ।

ऐसी बातों से प्रतिभा की प्रतिभा और माया का निट्ठलापन सब छुप जाता । प्रतिभा अंदर ही अंदर ऐसी बातें सुनकर बहुत दुखी होती लेकिन फ़िर भी चुप ही रहती । वह जानती थी कि उपहारों की हकदार वह है न कि माया लेकिन कोई भी उसके मन की बात को कभी नहीं समझ पाता । प्रतिभा को माया की कमजोरी का अहसास था लेकिन माया प्रतिभा के गुणों को कभी न पहचान पाई ।

ऐसा करते-करते वह दोनों बारहवीं तक की परीक्षा पास कर गईं और आगे उच्च शिक्षा के लिए कालेज में दाखिले हेतु उनको सामान्य ग्यान पर आधारित एक बौधिक परीक्षा पास करनी थी । अब असली इम्तिहान की घडी थी । जो माया हर बार अपने परिणाम से सबको चौंका देती थी वही माया दाखिले हेतु एन्ट्रैंस टेस्ट भी पास न कर पाई और प्रतिभा ने प्रवेश परीक्षा में प्रथम स्थान अर्जित कर सबको चौंका दिया । अब सबको प्रतिभा की प्रतिभा का अहसास हुआ था और माया को भी अब प्रतिभा के गुणो और मेहनत के मूल्य का अनुभव हुआ ।

बच्चो इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि हमें सच्चे मन से मेहनत करते रहना चाहिए । मेहनत ही सफ़लता की कुंजी है और कभी बेकार नहीं जाती । एक न एक दिन मेहनत का मूल्य अवश्य पडता है ।

2 जन ने कहा है:

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

मेहनत का कोई विकल्प नहीं.

manu ने कहा…

चित्र से तो पता नहीं चल रहा के कौन सी प्रतिभा है और कौन सी माया,,,,
पर दोनों बच्चियां प्यारी लग रही हैं....
बहुत अच्छी कहानी,,,

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