बच्चों, बहुत खोजबीन के बाद, अचपन जी ने नन्हा मन पर उड़न तश्तरी उतारने में सफलता पाई ! देखा ? तो.. सी-बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दो !

पढ़ने वाले भैय्या, अँकल जी और आँटी जी,
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
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आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !

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प्यारे बच्चो , आपको और सभी भारतवासियों को आजादी की हार्दिक बधाई और शुभ-काम्नायें । स्वतंत्रता दिवस पर पढिए देश भक्ति की रचनाएं यहां ......

08 मई 2009

फ़ूड पोयाएज़न

नमस्कार बच्चो ,
कैसे हैं आप सब लोग ? आज मै आपको सुनाऊंगी एक कहानी- फ़ूड पोयाएज़न
एक लडका था , जिसका नाम था विशाल । विशाल बहुत ही प्यारा बच्चा था । अपने मम्मी-पापा से खूब प्यार करता । उसके मम्मी-पापा भी उससे खूब प्यार करते । विशाल के मम्मी-पापा दोनों नौकरी पेशा थे । इसलिए विशाल को स्कूल के बाद शाम तक डे-केयर में ही रहना पडता । विशाल सारा दिन डे-केयर में बिताता और शाम को जब मम्मी-पापा घर आ जाते तो घर में खूब मस्ती करता । कभी-कभी विशाल को बुरा लगता लेकिन फ़िर भी वह मम्मी-पापा की मजबूरी समझता था , इस लिए कभी शिकायत न करता । मम्मी सुबह-सुबह खाना बनाकर दिन भर के लिए विशाल को खाने का सामान दे देती । एक दिन मम्मी की तबीयत ढीली हो गई और वह विशाल के लिए खाना नहीं बना पाई । मम्मी ने विशाल को पैसे दिए कि वह स्कूल की कैण्टीन से कुछ खा लेगा । विशाल ने उस दिन कैण्टीन से समोसा, पूरी मजे से खाए , बस फ़िर क्या था , उसे घर का खाना फ़ीका लगने लगा । अब तो वह हर रोज मां से पैसे मांगता ताकि वह बाहर से चटपटा खाना खा सके । मां के लिए भी आसान हो गया , वह भी सुबह-सुबह खाना बनाने के झंझट से मुक्त हो गई । एक दिन विशाल ने स्कूल के बाहर खडे फ़ल वाले से फ़ल खाए जो उसने न जाने कितनी देर पहले से ही काट कर रखे थे ।विशाल अपने हाथ धोना भी भूल गया । चटपटे मसालेदार फ़लों की चाट खाकर विशाल को खूब मजा आया । लेकिन थोडी ही देर में उसके पेट में दर्द होने लगा और उलटियां भी करने लगा । बार-बार उल्टी करने से विशाल की हालत बहुत नाजुक हो गई । पेट दर्द से वो कराह रहा था । जल्दी से उसे अस्पताल पहुंचाया गया । जहां पर उसे कितने सारे इंजैक्शन लगे और दवाईयां भी लेनी पडीं । डाक्टर अंकल नें बताया कि विशाल की यह हालत गंदी चीजें खाने से हुई है । बहुत देर पहले से कटे हुए फ़ल या फ़िर ऐसा खाना जिस पर मक्खी-मच्छर बैठे हो या फ़िर बिना हाथ धोए खाने से फ़ूड पोयाएज़न हो जाता है । जहरीले कीटाणु हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं जो खतरनाक साबित हो सकता है और समय पर इलाज न हो तो जान भी जा सकती है । यह सारी बातें सुनकर मम्मी को अपनी गलती का अहसास हुआ । दो-तीन दिन में विशाल की तबीयत कुछ सुधरने लगी ।अगले कुछ दिन तक वह स्कूल नहीं जा पाया और मम्मी-पापा को भी छुट्टियां लेकर घर में रहना पडा । इस सब से विशाल भी अपने आप को दोषी मानने लगा और आगे से मम्मी को गंदा खाना न खाने आ वचन दिया ।
1.आपने भी समझा न कि गंदा खाना खाने का परिणाम क्या होता है ?
2.बहुत देर पहले कटे हुए फ़ल कभी नहीं खाने चाहिएं ।
3.बाहर से कुछ खाने से पहले सफ़ाई और स्वच्छता को अच्छी तरह जांचना चहिए ।
4.कुछ भी खाने से पहले हाथ जरूर धोने चाहिएं ।
5.हो सके तो केवल घर में बना हुआ साफ़-सुथरा , सादा भोजन करना चाहिए ।
6.कभी चटपटा खाने का मन भी करे तो ताजा ही खाना चाहिए , बासी नहीं ।
7.और हां अभी खूब गर्मीं पड रही है न तो बाहर जाते हुए अपना पानी और छाता अपने साथ रखना कभी मत भूलना , फ़िर देखना तुम कभी बीमार नहीं पडोगे

अपनी गर्मी की छुट्टियों में खूब मस्ती करना ।
बाय-बाय
आपकी
सीमा सचदेव

1 जन ने कहा है:

Mired Mirage ने कहा…

बच्चों के लिए अच्छा लेख है।
घुघूती बासूती

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