बच्चों, बहुत खोजबीन के बाद, अचपन जी ने नन्हा मन पर उड़न तश्तरी उतारने में सफलता पाई ! देखा ? तो.. सी-बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दो !

पढ़ने वाले भैय्या, अँकल जी और आँटी जी,
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
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प्यारे बच्चो , आपको और सभी भारतवासियों को आजादी की हार्दिक बधाई और शुभ-काम्नायें । स्वतंत्रता दिवस पर पढिए देश भक्ति की रचनाएं यहां ......

27 मई 2009

चालाकी का फ़ल


एक जंगल में एक पेड के नीचे दो बिल्लियां इक्कट्ठी रहती थी । वह दोनों सदा एक दूसरे का साथ देतीं , जो भी मिलता मिल बांट कर खाती । उसी पेड पर कुछ दिनों से एक बंदर आकर रहने लगा । बंदर बहुत चालाक था । बिल्लियां उसे अपना दोस्त समझने लगीं । उन्हें जो भी मिलता वो बंदर के साथ मिल-बांट कर खातीं पर बंदर को जो मिलता वह अकेले ही हडप्प कर जाता । वह बिल्लियों को मूर्ख समझता और उनके भोलेपन का खूब फ़ायदा उठाता । कुछ दिन तक तो यह सब चलता रहा लेकिन एक दिन बिल्लियों ने अपना खाना पेड के नीचे रखा और पानी पीने थोडी दूरी पर गईं तो इतने में बंदर आ गया । खाना देखकर उसके मुंह में पानी भर आया ,झट से बिल्लियों का खाना खाने लगा और फ़टाफ़ट सारा खाना हज्म कर पेड पर चढ गया । जब बिल्लियां वापिस आईं तो उन्होंने वहां से खाना गायब पाया और ऊपर बंदर को मजे से बैठे देखा तो बंदर से बोलीं-
बंदर भैया , बंदर भैया क्या आपने हमारा खाना खाया है ।
नहीं , नहीं मै तो अभी बाहर से आया हूं , मै भला तुम्हारा खाना कैसे खा सकता हूं ।
तो क्या तुमने किसी को खाना खाते देखा है ?
नहीं , नहीं मैने नहीं देखा , मै तो पेड पर बैठा था ।(बंदर मन ही मन मुस्काने लगा )
बिल्लियां समझ गईं कि बंदर झूट बोल रहा है उसी ने खाना खाया है । भला यह कैसे हो सकता है कि बंदर पेड पर बैठा हो और खाना किसी और ने खाया तो उसने देखा भी न हो । उन्हें बंदर की चालाकी पर बहुत गुस्सा आया लेकिन मन ही मन में दबा लिया और बंदर से बदला लेने की ठानी और अब तो दोनो विचार करने लगीं कि कैसे बंदर को सबक सिखाया जाए । एक दिन उन्होंने देखा कि बंदर हाथ में रोटी दबाए पेड पर चढा है , बस दोनों को मौका मिल गया , और बोलीं-
बंदर भैया , बंदर भैया जलदी हमारे साथ आओ । वो जो थोडी दूरी पर केलों का बाग है न , आज उसका स्वामी बाग में नहीं है । चलो हम तीनों वहां चलकर खूब केले खाएंगे । बंदर सुनकर बहुत खुश हुआ और बिल्लियों की मूर्खता पर अंदर ही अंदर हंसने भी लगा ।बंदर सारे केले अकेले ही हड्डप कर जाना चाहता था
और बोला-
नहीं , नहीं बहनो , तुम दोनों यहीं रुको और मै जलदी से जाकर केले लेकर आता हूं ।कहीं किसी ने हम तीनों को इक्कठे देख लिया तो समस्या हो जाएगी ।
बिल्लियां तो यही चाहती ही थीं , मुस्कुरा कर बोली- ठीक है भैया तुम जाओ और हम यहीं तुम्हारा इंतजार करेंगी ।
बंदर अपनी रोटी वहीं पर रखकर जलदी से बाग की तरफ़ भागा और बिना इधर-उधर देखे जलदी से बाग में घुस कर एक पेड पर चढ गया ।
उधर बिल्लियां बंदर के जाते ही पेड पर चढी और रोटी मजे से खाकर नीचे आकर आराम से सो गईं ।
बंदर ने baa में घुसकर अभी एक भी केला न तोडा था कि पीछे से बाग के मालिक नें आकर बंदर की पीठ पर जोर से लाठी से प्रहार किया । बंदर अचानक प्रहार से तडपने लगा और दुम दबाकर ऐसा भागा कि पेड के नीचे ही आकर सांस ली । देखा दोनों बिल्लियां मजे से सो रही हैं । उसे अपनी रोटी का ध्यान आया , जलदी से ऊपर जाकर देखा तो रोटी भी गायब थी । बंदर बिल्लियों की चालाकी समझ गया और अपनी मूर्खता और गलती पर पछताने लगा ।यह उसकी चालाकी का फ़ल था ।

5 जन ने कहा है:

Nirmla Kapila ने कहा…

सुन्दर और प्रेरक बाल कथा है बधाई

अनिल कान्त : ने कहा…

bahuthhi kahani hai

Science Bloggers Association ने कहा…

रोचक, प्रेरक।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत ही अच्छी कहानी है...............बच्चे तो हंसते हंसते लोट पोट हो जायेंगे........

दिव्य नर्मदा ने कहा…

बंदर जी ने ठग लिया, बिल्ली को जब खूब.

समझ गयीं पर बिल्लियाँ, गयीं न दुःख में डूब..

सबक सिखायें, सोचकर, जल्दी किया उपाय.

लट्ठ पड़ा, बंदर पिटा, मन ही मन पछताय..

बच्चों रोचक कहानी, दे शिक्षा अनमोल.

खिड़की रखो दिमाग की, हरदम ही तुम खोल..

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