बापू के तीन बन्दर
नमस्कार बच्चो ,
आज हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का जन्मदिवस है , आप सबको बापू के जन्मदिवस की बधाई |
उनके तीन बंदरों के बारे में तो आपने सूना होगा , आओ मैं बताऊँ की क्या कहते हैं ये बापू के तीन बन्दर .....................

मोहन दास कर्म चन्द गान्धी
दिलाई हमें जिसने आजादी
दिए उन्होंने नेक विचार
बांटो सब आपस मे प्यार
तीन बन्दरों का सुनो सन्देश
नही होगा फिर कभी क्लेष
देखो अब यह पहला बन्दर
उंगलियां डाली कान के अन्दर
बुराई किसी की कभी न सुनना
जो विरोध न जानो करना
आँखों को हाथों से छुपाया
दूसरे बन्दर ने बताया
देखो न कभी कोई बुराई
जो न कर सको अच्छाई
तीसरा मुँह पर उंगली रखकर
देता है सन्देश यह आकर
बुरी बात कोई कभी न बोलो
सोच समझ कर ही मुँह खोलो
जो इन पर हम करें विचार
बांट सकेन्गे हम भी प्यार
आओ इन्हें हम भी अपनाएं
जीवन को सुखमय बनायें
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7 जन ने कहा है:
I like this poem...
very nice !!!
दो अक्टूबर को जन्मे,
दो भारत भाग्य विधाता।
लालबहादुर-गांधी जी से,
था जन-गण का नाता।।
इनके चरणों में मैं,
श्रद्धा से हूँ शीश झुकाता।।
mahatmaa ji ke jamndin ki badhaayi ...
aapko bhi badhaayi...
सीमा जी,बहुत सुन्दर और संदेशपरक है आपका यह बालगीत--बापू और शास्त्री जी के जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें स्वीकारें।
कितनी सुंदर कविता है..... जो इतनी अच्छी बातें भी बता रही है......
सुंदर ,संदेशयुक्त प्रेरणात्मक कविता है .
बहुत सुन्दर शिक्षाप्रद रचना ...आभार
नन्ही ब्लॉगर
अनुष्का
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