बच्चों, बहुत खोजबीन के बाद, अचपन जी ने नन्हा मन पर उड़न तश्तरी उतारने में सफलता पाई ! देखा ? तो.. सी-बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दो !

पढ़ने वाले भैय्या, अँकल जी और आँटी जी,
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
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प्यारे बच्चो , आपको और सभी भारतवासियों को आजादी की हार्दिक बधाई और शुभ-काम्नायें । स्वतंत्रता दिवस पर पढिए देश भक्ति की रचनाएं यहां ......

14 अप्रैल 2010

वैसाखी का मेला

नमस्कार बच्चो ,
आपको पता है आज कौन सा दिन है ?....आज है बैसाखी पर्व पंजाब का एक सुप्रसिद्ध त्योहार । आज हम आपको बताएंगे कि यह त्योहार मनाने के पीछे क्या मान्याताएं हैं और यह त्योहार कैसे मनाया जाता है ।




वैसाखी का लगा है मेला
खुश सारे क्या गुरु क्या चेला
आओ सुनाऊँ पुरानी बात
वैसाखी का है इतिहास
सिख धर्म के दश गुरु थे
दशम गुरु श्री गोबिन्द सिंह थे
होता लोगों पे अत्याचार
आया उनको एक विचार
क्यो न ऐसा पंथ बनाएँ
और लोगो की रूह जगाएँ
जिससे समझे खुद को लोग
मिटाएँ अत्याचार का रोग
उसमें सबको शिक्षा देंगे
मानवता के लिए लड़ेंगे
ऐसा पंथ उन्होंने साजा
जिसमें ना परजा ना राजा
होंगे सारे गुरु के शिष्य
सँवारेगे देश का भविष्य
शिष्य चुने उन्होने पाँच
की पहले उन सबकी जाँच
क्या वो देश पे मर सकते है ?
सच्च के लिए क्या लड़ सकते है?
कराया सबको अमृतपान
कड़ा,केस,कञ्घा,किरपान
देकर उनको सिख नवाजा
ऐसे खालसा पंथ था साजा
वैसाखी का दिन था पावन
सन था सोलह सौ निन्यावन
सिख धर्म का यह उपहार
तब से ही मनता त्योहार
.................
.................
एक बात मैं और बताऊँ
एक और इतिहास सुनाऊँ
जब था अपना देश गुलाम
अंग्रेजों का था बस नाम
भारत माँ को बनाया दासी
दुखी थे इससे भारतवासी
किसी तरह भारत को बचाएँ
अंग्रेज़ों को दूर भगाएँ
सन था तब उन्नीस सौ उन्नीस
था वैसाखी का पावन दिन
लोगो ने मिलकर सभा बुलाई
होगी अंग्रेज़ों की विदाई
जगह थी जलियाँ वाला बाग
अमृतसर में है भी आज
अंग्रेजों को पता चला जब
हुए लाल-पीले सुन के तब
नहीं सभा वो होने देंगे
न ही भारत को छोड़ेंगे
आ गया वहाँ पे जनरल डायर
अचनचेत ही कर दिए फायर
लोगो की थी भीड़ अपार
जनरल खड़ा बाग के द्वार
सारा मार्ग बन्द कर दिया
और लाशों से बाग भर दिया
सैकड़ों लोग वहीं पर मर गए
बाकी सबको जागरूक कर गए
व्यर्थ न हुआ उनका खून
लोगों में भर गया जुनून
सबके खून का बदला लेंगे
अंग्रेजो को नहीं सहेंगे
सबने मिलकर लड़ी लड़ाई
अंग्रेज़ों से मुक्ति पाई
हो गया अपना देश आजाद
गए अंग्रेज़ देश से भाग
.................
..................
लगते हैं मेले हर साल
हो किसान जब मालामाल
फसलें जब सारी पक जाती
कट कर जब घर पर आ जाती
भर जाते हैं किसानों के घर
तब उनको नहीं होता कोई डर
वर्षा आए या तूफान
उनपे मेहरबान भगवान
सारे साल का मिल गया खाना
फिर क्यों न त्योहार मनाना
मिल कर सारे नाचे गाएँ
आओ हम वैसाखी मनाएँ
उन शहीदों को भी रखे याद
और ईश्वर से करे फरियाद
खुशियों के लगते रहे मेले
और सारे दुखों को हर ले

बैसाखी पर्व की आप सबको हार्दिक बधाई

कवयित्री- सीमा सचदेव

6 जन ने कहा है:

Suman ने कहा…

nice

दिलीप ने कहा…

achha gyaan parosa hai baisakhi ke vishay me dhanyawad...
http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

Udan Tashtari ने कहा…

ज्ञानवर्धक रचना जानकारीपूर्ण.

Amitraghat ने कहा…

बहुत ही सरल तरीके से आपने इतिहास को समेट लिया कविता में ..बच्चों को यकीनन पसन्द आएगा......."

Manju Gupta ने कहा…

बच्चों - बड़ों के लिए सचित्र -सहज कविताओं के साथ वैसाखी की तीन ऐतिहासिक
घटनाओं की ज्ञानवर्धक जानकारी सराहनीय है .

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपने बैशाखी पर बहुत उपयोगी जानकारी दी है!
बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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