नन्हा मन
08 जून 2010
“श्यामपट (BLACK-BOARD” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
08 अप्रैल 2010
"‘नन्हा-तारा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
01 फ़रवरी 2010
‘‘मेरा कुत्ता बड़ा निराला’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

घर की रखवाली करता है।
नही किसी से यह डरता है।।
प्यारा सा है इसका नाम।
सब कहते हैं इसको टाम।।
खीरा, आम चाव से खाता।
सेव, टमाटर चट कर जाता।।
नित्य नियम से हमें जगाता।
भौं-भौं कर आवाज लगाता।।
प्राची को लगता यह प्यारा।
घर भर का यह राज-दुलारा।।
07 जनवरी 2010
‘‘कौआ’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

23 दिसंबर 2009
"नये-नये कुछ पेड़ लगाना।" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
(सभी चित्र गूगल सर्च से साभार)
02 नवंबर 2009
"सब बच्चों का प्यारा मामा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
05 जुलाई 2009
"अब पढ़ना मजबूरी है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)
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20 जून 2009
"भैया! मुझको भी, लिखना-पढ़ना, सिखला दो।" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयक)

क.ख.ग.घ., ए.बी.सी.डी,
गिनती भी बतला दो।।
पढ़ लिख कर मैं,
मम्मी-पापा जैसे काम करूँगी।
दुनिया भर में,
बापू जैसा अपना नाम करूँगी।।
रोज-सवेरे, साथ-तुम्हारे,
मैं भी उठा करूँगी।
पुस्तक लेकर पढ़ने में,
मैं संग में जुटा करूँगी।।
बस्ता लेकर विद्यालय में,
मुझको भी जाना है।
इण्टरवल में टिफन खोल कर,
खाना भी खाना है।।
छुट्टी में गुड़िया को,
ए.बी.सी.डी, सिखलाऊँगी।
उसके लिए पेंसिल और,
इक कापी भी लाऊँगी।।
08 जून 2009
मेरा झूला बड़ा निराला
जब झूला पा जाती हूँ।
करता है मन को मतवाला।
मुझको हँसता देख,
नये खिलौने लाते हैं।
15 मई 2009
किलकारी भरकर जब बालक - डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

किलकारी भरकर जब बालक,
पुलक-पुलक मुस्काते हैं।
नया खिलौना पाकर के,
ये फूले नही समाते है।
किलकारी भरकर जब बालक,
पुलक-पुलक मुस्काते हैं।
तुतलाई भोली-भाषा में,
जब ये अधर खोलते हैं,
मम्मी-पापा के मन को,
ये बालक बहुत रिझाते हैं।
किलकारी भरकर जब बालक,
पुलक-पुलक मुस्काते हैं।
माँ की गोदी में इनका,
संसार समाया रहता है,
नन्हें मन की शैतानी से,
ये सबको हर्षाते हैं।
किलकारी भरकर जब बालक,
पुलक-पुलक मुस्काते हैं।
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