
क्या किसी को कोई जंगल की कहानी याद है ?
चित्रकार प्रतीक घोष के चित्र पर सीमा सचदेव की कहानी
बंदर को इक मिली किताब
मज़े से पढने लगे जनाब
रखकर अपनी टांग पे टांग
जंगल में जा किया स्वांग
लगे दिखाने खुद को ग्यानी
सब जीवों को हुई हैरानी
क्या चिडिया क्या सांप हिरन
आए भाग वहां पर फ़ौरन
देख वहां पर शेर भी आया
बोला किसने तुम्हें भरमाया
लगे देखने खुली किताब
बंदर जी हमें दो जवाब
यह क्या तेरे हाथ लगा है
क्या किसी नें तुम्हें ठगा है
लगा बखेरने बंदर ग्यान
सुनो बात मेरी दे कान
इसमें भरा अमूल्य धन
बदल जाए जिससे जीवन
जो भी इसका साथ निभाए
यह उसको ऊंचा ले जाए
पढकर इसको आए बुद्धि
हो जाए हर मन की शुद्धि
जिसने जान लिया यह राज
सजता उसके सर पर ताज
जो भी इसको अपना बनाए
जीवन में सदा सुख पाए
देखो ,मानव नें इसे पढकर
बना लिए हैं सुन्दर घर
हम हैं कितने बडे नादान
नहीं सके इसको पहचान
तभी तो हम जानवर कहलाते
खुद को भी बचा नहीं पाते
जो हम इसका राज समझते
तो न हम किसी से डरते
खत्म न होते प्यारे जंगल
तो जंगल में होता मंगल
मिटता कभी न अपना बसेरा
मजे से जमता अपना डेरा
न कम होते अपने साथी
न मिटती कोई पशु जाति
आओ इसको पढकर सारे
अपनी कमियों को विचारें
नहीं रहें किसी पर निर्भर
तन से हम हैं ताकतवर
जो थोडी बुद्धि भी आए
तो हम भी महान बन जाएं
बात सभी की समझ में आई
मिलकर करने लगे पढाई




