नन्हा मन

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26 जनवरी 2010

राष्ट्र प्रहरी



राष्ट्र के प्रहरी सजग
सतत सीमा पर सजग
हाथ में हथियार है
वार को तैयार है ।

शत्रु पर आँखें टिकी
सांस आहट पर रुकी
सीमा न लांघ पाये
दुश्मन न भाग पाये ।

ठंड हो कितनी कड़क
झुलसती गरमी भड़क
परवाह न तूफान की
गोलियों से जान की ।

जान लेकर हाथ पर
खड़ा सीमा हर पहर
वीर बन पहरा सतत
राष्ट्र की रक्षा निरत ।

बस यही अरमान है
वार देनी जान है
चोट इक आये नही
आन अब जाये नही ।

बाढ़ हो तूफान हो
आपदा अनजान हो
वीर है तत्पर सदा
निसार जान को सदा ।

कवि कुलवंत सिंह

25 जनवरी 2010

जय हो ! भारत माँ की जय हो !

जय हो ! भारत माँ की जय हो !

मुकुट शीश उन्नत शिखर
पदतल गहरा विस्तृत सागर
शोभित करती सरिताएं हों
जय हो ! भारत माँ की जय हो !

सत्य, अहिंसा, त्याग भावना
सर्वमंगल कल्याण प्रार्थना
जन -जन हृदय महक रहा हो
जय हो ! भारत माँ की जय हो !

पुरा संस्कृति उत्थान यहीं पर
धर्म अनेक उद्गम यहीं पर
पर उपकार सार निहित हो
जय हो ! भारत माँ की जय हो !

विद्वानो, वीरों की पुण्य धरा
बलिदानों से इतिहास भरा
तिलक रक्त मस्तक धरा हो
जय हो ! भारत माँ की जय हो !

साहित्य, खगोल, आयुर्विज्ञान
योग, अध्यात्म, अद्वैत, ज्ञान
ज्ञानी, दृष्टा, ऋषि, गुणी हों
जय हो ! भारत माँ की जय हो !

राष्ट्र उत्थान भाव निहित हो
धर्म दया से अनुप्राणित हो
जग में भारत विस्तारित हो
जय हो ! भारत माँ की जय हो !

कवि कुलवंत सिंह

12 अगस्त 2009

आजादी की कहानी , भारत माता की जुबानी

नमस्कार बच्चो ,
आजकल आप सब बहुत व्यस्त होंगे हमारे राष्ट्रीय त्योहार स्वतंत्रता दिवस को मनाने के लिए । हर तरफ़ देश भक्ति का महौल दिख रहा है । बज़ार तिरंगे झण्डों से सजे दिख रहे हैं । हम सब बहुत खुश हैं क्योंकि १५ अगस्त को हम आज़ादी दिवस मनाने जा रहे हैं यह वो दिन है जिस दिन न जाने कितने वीरो की कुर्बानी के उपरान्त भारत अंग्रेजों की गुलामी से १५ अगस्त १९४७ को आज़ाद हुआ था और तब से लेकर आज तक हम इसे पूरे उत्साह से मनाते आ रहे हैं । इस आजादी के लिए भारतियों को लम्बा संघर्ष करना पडा था । आप भी सुनोगे आजादी की कहानी । तो आओ मेरे साथ और सुनो-

आजादी की कहानी , भारत माता की जुबानी

शुभाशीष बच्चो , मै तुम्हारी माता
मेरा तुम्हारा जन्म जन्म का नाता
मैं वही जिसने इस भू को सजाया
मैं वही जिसने आपको भारतीय बनाया
मैं वही जिसकी गोदि में राम कष्ण बुद्ध आए
रिषी मुनि तपस्वियों ने यग्य रचाए
मै वही जिसने पहना राजमाता का ताज
मं वहीजिसने गाया एकता का साज
मेरे आंचल की छाया में फ़ला-फ़ूला हिन्दुस्तान
जो बना विश्व में महान
मेरी पावन धरती पर गंगा यमुना का बसेरा
जहां सबसे पहले होता है सवेरा
मैने बस प्यार बरसाया , आंचल फ़ैलाया
गैरों को भी गोदि में बैठाया
मैने कभी कोई भेद-भाव न जाना
गैरों को भी अपना ही माना
विचरती रही मै बस ममता के ख्याल में
और फ़ंसती गई गुलामी के जाल में
जिन्हें अपने घर में बसाया
उन्हींने म्झे गुलाम बनाया
मैं रोती रही पुकारती रही
अपनी दासता पर विचारती रही
फ़िर आई मेरी बेटी लक्ष्मी मर्दानी
सुनी तो है आपने उसकी कहानी
जिसने दुश्मन को ललकारा
दे दिया मेरी आजादी का नारा (वन्दे मातरम )
बस फ़िर मेरे बच्चे आते गए
अपना खून बहाते गए
मेरी खातिर जान तली पर धरते रहे
झुके नहीं बस मरते रहे
मेरे ही सामने मिटते रहे मेरे लाल
फ़िर भी उनकेकितने उच्च थे ख्याल
मां को बंधक न रहने देंगे
भले ही हमारे सिर कटेंगे
फ़िर आया अहिंसा का पुजारी
सत्य पथ अपना पलट दी दुनिया सारी
ऐसा उसने चमत्कार कर दिखाया
मुझे गुलामी से आजाद कराया
मैनें फ़िर से गर्व से सिर उठाया
मेरे बच्चों ने मुझे यह ताज पहनाया
आज मैं सुरक्षित हूं
क्योंकि मेरे बच्चों द्वारा रक्षित हूं
मुझे गर्व है मैं हूं आपकी माता
अमरता तक रहेगा अपना नाता
मेरे बच्चो तुम्हीं मेरी जान हो , तुम्हीं मेरी जिंद
एक बार मिलकर बोलो जय हिन्द , जय हिन्द

24 मई 2009

बाल-गीत: भारत माता -आचार्य संजीव 'सलिल'

भारत माता

मदर इंडिया, भारत माता,

जयकारा मेरे मन भाता

हिंदी-अंग्रेजी का लड़ना-

मुझको बिल्कुल नहीं सुहाता.

दुनिया की हर भाषा-बोली,

बच्चों की होती हमजोली.

ज्ञान-ध्यान की बात बतायें ,

सीख-सिखायें खुशियाँ पायें.

हम अनेक फ़िर भी हैं एक,

कभी न खोयें स्नेह-विवेक.

लिख,पढ़,बढ़ सबको सुख देंगे'

पीड़ित के आँसू पोछेंगे.

मेहनत ही है सच्ची पूजा.

नहीं साधना का पथ दूजा.

'सलिल' हाथ से हाथ मिलाकर,

हँसें सभी को गले लगाकर...

19 मई 2009

बाल-गीत: मेरा देश

सबसे प्यारा मेरा देश,

सबसे न्यारा मेरा देश।

पुरा-पुरातन, चिर नवीन यह-

शान्ति-स्नेह का दे संदेश...

राम-कृष्ण की धरती पावन,

सरस्वती गणपति मनभावन।

खुसरो, सूर, कबीरा, मीरा,

बाजे ढोलक, झांझ, मंजीरा।

होली, ईद, दीवाली, राखी,

क्रिसमस, ओडम औ' बैसाखी।

स्वर्ग सद्रश सुख रहे हमेश...

गौतम-गाँधी की यह धरती,

सत्य-परिश्रम पथ-पग धरती।

शीश मुकुट है धवल हिमालय,

कंकर-शंकर, घर देवालय।

नेह-नर्मदा, कृष्णा-गंगा,

श्रम उन्नति निर्माण तिरंगा।

भय-दुःख किंचित रहे न शेष...

आओ! इस पर बलि-बलि जाएँ,

सकल विश्व को ग्राम बनाएं।

पढ़ें-सुनें रामायण-गीता,

बाइबल, ग्रन्थ, कुरान पुनीता।

ध्वजा तिरंगी मिल फहराएँ,

नील चक्र दस दिश जय पाये।

तरसें पाने जन्म सुरेश...

******

27 जनवरी 2009

प्रणाम तुझे भारत माता

गणतंत्र दिवस पर - इतिहास के आईने में भारत


प्रणाम तुझे भारत माता
प्रणाम तुझे भारत माता
तेरे गुण सारा जग गाता
अनुपम तेरी जीवन गाथा

संघर्षरत रह कर तुमने
अपना यह नाम कमाया है
अपने ही भुजबल से तुमने
अपने को उँचा उठाया है

हम नमन् तुम्हें करते-करते
इतिहास तेरा पढ़ते-पढ़ते
मस्तक श्रद्धा से झुकता है
बस याद तुम्हें करते-करते

वैदिक युग की महारानी तुम
युग परम्परा की परवक्ता
सभय-संस्कृति का मेल तुम्हीं
स्वराज्य यहाँ राज्य करता

लौकिक युग की शहज़ादी को
पलकों पे बिठाया जाता था
दे कर सनडर रूप तुम्हें
जब भाग्य जगाया जाता था

मध्य युग में अर्धांगिनी का
रूप तुम्हें जब दे ही दिया
तो भी तुमने चुपचाप रह
अपने उस रूप को वरण किया

पैरों की दासी बना दिया
जब भारत की महारानी को
तब कौन सहन कर सकता है
माँ की ऐसी कुर्बानी को

कोई बेटा नहीँ यह सह सकता
माँ को दासी नहीँ कह सकता
फिर तेरे बेटों ने ठान ली
माँ की ममता पहचान ली

निकले फिर माँ के रखवाले
सचमुच ही थे वो दिलवाले
बाँध लिया था कफ़न सिर पर
और उठा लिया माँ को मरकर

उन वीरों ने जो खून दिया
और इतना बड़ा बलिदान दिया
कितना वो माँ को चाहते हैं
मर करके यही सबूत दिया

माँ को आज़ाद करा ही दिया
दुश्मन को घर से भगा ही दिया
रक्षा की माँ के ताज़ की
बनी रानी भारत राज की

देश आज़ाद हुआ अपना
वर्षों से था जो इक सपना
माँ ने कितने बेटे खोए
बिन स्वारथ के जो जा सोए

अच्छे- बुरे हम जैसे भी हैं
क्या कम? हम भारतवासी हैं
सर उँचा रहता है अपना आज
क्योंकि अपना है देश आज़ाद

भारत माता है महारानी
हमें स्मरण है वीरों की कुर्बानी
जो इस पर नज़र उठाएगा
वो हमसे नहीँ बच पाएगा
************************

गणतंत्र दिवस की सभी भारतियों को हार्दिक बधाई
भारत माता की जय , वंदे मातरम ,जय हिंद

6 पाठकों का कहना है :

Udan Tashtari का कहना है कि -
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

January 25, 2009 5:22 PM
शोभा का कहना है कि -
सीमा जी
बहुत सुन्दर कविता और संदेश है। गणतंत्र दिवस की बधाई

January 25, 2009 6:14 PM
मोहन वशिष्‍ठ का कहना है कि -
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

बहुत सुंदर कविता एक मैंने भी लिखी है कृप्‍या देखिएगा जरूर

January 25, 2009 6:43 PM
संगीता पुरी का कहना है कि -
बहुत सुंदर कविता..........गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई।

January 25, 2009 10:38 PM
neelam का कहना है कि -
भारत माता है महारानी
हमें स्मरण है वीरों की कुर्बानी
जो इस पर नज़र उठाएगा
वो हमसे नहीँ बच पाएगा
वीर भाव को जगाने वाली पंक्तियों के साथ हम भी बस इतना ही कहना चाहेंगे ,भारत माता की जय

January 27, 2009 10:31 AM
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -
भावपूर्ण मन को छूती पद्य रचना.

पढ़ने वाले भैय्या, अँकल जी और आँटी जी,
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
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