
नील गगन में उजला चाँद
साथ हमारे करता बात
थकते नहीं थे मामा कहते
क्यों नहीं करते अब मुझको याद।

नभ के तारों जैसी परियाँ
संग में लेकर मुझको भी
सपनों में आती थीं तुम्हारे
क्या तुमको अब नहीं वो याद।
मांएँ जो लोरी सुनातीं तुमको
गा-गाकर रोज़ सुलातीं तुमको
आओ प्यारे चँदा मामा
दुनिया तुमको करती याद।
बच्चे बूढ़े और बड़े
प्यार सभी मुझे करते थे
तभी तो मेरे नाम से पहले
निकला करती थी किताब।

बड़ा ही खुश होता था मैं
हूँ आज भी तुम्हारा प्यारा मामा
रखो इतनी बात को याद।
भूल ना जाना बच्चों मुझको
है साथ तुम्हारा अच्छा लगता
हरदम तुम्हारे साथ रहूँगा
चँदा मामा ज़िन्दाबाद।
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पूनम