चूहा बिल्ली दोस्त बने
चूहा बिल्ली दोस्त बने
दोनों खाने लगे चने
बिल्ली चूहे को घुमाती
पीठ के ऊपर उसे बैठाती
चूहा लेकर आता दाने
बिल्ली का सब कहना माने
रह्ते दोनों हरदम पास
हुआ इक दूजे पर विश्वास
फ़ैल गई जंगल में कहानी
कहते सब इसको नादानी
मिलकर सब जीवों नें उनको
समझाने की ठानी
चूहे के घर सांप गया और
बिल्ली के घर शेर
तोडो इक दूजे से नाता
लाओ जरा न देर
छोडी दोनों नें ही यारी
और तोडा विश्वास
अब चूहा और बिल्ली दोनों
आते कभी न पास
चित्रकार- शुभम सचदेव











5 जन ने कहा है:
बहुत अच्छी लगी ...आभार
नन्ही ब्लॉगर
अनुष्का
सतयुग आ गया है , कल्पना अच्छी है काश सच हो जाए !
बेहतरीन बालगीत।
सुन्दर और रोचक कथा है!
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आपकी पोस्ट की चर्चा तो यहाँ भी है!
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http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/09/18.html
शुभम् का बनाया चित्र तो बहुत सुंदर है!
मन को भाने नए दोस्तों का दिन आया : सरस चर्चा (14)
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