बच्चों, बहुत खोजबीन के बाद, अचपन जी ने नन्हा मन पर उड़न तश्तरी उतारने में सफलता पाई ! देखा ? तो.. सी-बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दो !

पढ़ने वाले भैय्या, अँकल जी और आँटी जी,
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
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प्यारे बच्चो , आपको और सभी भारतवासियों को आजादी की हार्दिक बधाई और शुभ-काम्नायें । स्वतंत्रता दिवस पर पढिए देश भक्ति की रचनाएं यहां ......

20 अप्रैल 2010

समीर लाल समीर ( उडन-तश्तरी) जी की बाल-कविता - चिड़िया!!!!!

नमस्कार बच्चो ,

उस दिन हमें अमर अंकल नें बताया कि उन्होंने नन्हामन पर उडन-तश्तरी उतारी है और हम सब उसमें बैठकर आसमान की सैर भी कर आए । अमर अंकल नें इतना तो बताया कि उन्हें इसमें बहुत मेहनत करनी पडी , अब यह समझ में आया कि उस उडन-तश्तरी को उतारने में इतनी मेहनत क्यों लगी ?


भई उसके साथ समीर अंकल जो उतर रहे थे वो भी अपने दोस्तों के साथ , अब इतनी भारी-भरकम ह्म्म्म्म.....इतनी बडी उडन तश्तरी को उतरने में समय तो लगेगा ही न............। अमर अंकल को धन्यवाद जिन्होंनें समीर अंकल की उडन-तश्तरी नन्हामन पर उतार ली । अब देखिए समीर अंकल के साथ प्यारे-प्यारे दोस्त क्या कर रहे हैं । चलो बच्चो आप खूब मजे लेना अंकल के साथ , तो हो जाए मस्ती नन्हे-मुन्नों के लिए। अब पढते हैं समीर अंकल की कविता.......

एक है चिड़िया-


चूं चूं करती


चूं चूं करती


चीं चीं करती


नाम है उसका बोलू


इस डंडी से उस डंडी पर


उड़ती फिरती


कभी न गिरती


फुर्र फुर्र फुर्र फुर्र


फुर्र फुर्र फुर्र फुर्र






फिर दूजी चिड़िया भी आई


चूं चूं करती


चीं चीं करती


उड़ती फिरती




फुर्र फुर्र फुर्र फुर्र


फुर्र फुर्र फुर्र फुर्र

नाम बताया मोलू

झूले में वो झूल रही है

खुशी खुशी से बोल रही है

मेरी यार बनोगी, बोलू?

चूं चूं, चीं चीं

चूं चूं, चीं चीं

दोनों ने यह गाना गाया

कूद कूद के खाना खाया


तब तक तीजा दोस्त भी आया
नाम जरा था अलग सा पाया

हिन्दु मुस्लिम सिख इसाई

चिड़ियों ने यह जात न पाई

जिसने पाला उसकी होती

उसी धर्म का बोझ ये ढोती

मुस्लिम के घर रह कर आई


एक नहीं पूरे दो साल

ऐसा ही तो नाम भी उसका


सबने कहा उसे खुशाल

वो भी झूला उस झूले पर

इस झूले पर, उस झूले पर


हन हन हन हन


घंटी वो भी खूब बजाता


ट्न टन टन टन

फिर सबके संग खाना खाता

मिल मिल करके गाना गाता


चूं चूं, चीं चीं


चूं चूं, चीं चीं

तीनों सबको खुश रखते हैं


ठुमक ठुमक के वो चलते हैं

खुशी में होते सभी निहाल

बोलू, मोलू और खुशाल!!


हम भी मिलकर

गाना गाते

चूं चूं, चीं चीं

चूं चूं, चीं चीं

उड़ते जाते

फुर्र फुर्र फुर्र फुर्र

फुर्र फुर्र फुर्र फुर्र

-समीर लाल 'समीर'
जितने भी बच्चे पढेंगे , उन सबको समीर अंकल की तरफ़ से एक-एक मिल्की-बार । अपनी हाजिरी लगाना मत भूलिएगा ।


23 जन ने कहा है:

Amitraghat ने कहा…

आनन्ददायक कविता और सार्थक भी....."

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बढ़िया सन्देश देती हुई बाल कविता!
समीरलाल जी को बधाई!

Suman ने कहा…

nice

दिलीप ने कहा…

bahut hi pyari bal kavita..

http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

sansadjee.com ने कहा…

वाह समीर भाई, पढ़कर मजा आ गया। बधाई आपकी क्रियेटिविटी को।

अल्पना वर्मा ने कहा…

waah! yeh to bahut hi achchhee baal -kavita hai.

milky bar ke liye thnx

डा० अमर कुमार ने कहा…


नेईं दिदी, पैले मिल्ति बाल दो, तब तब हम ना, तब इछ अच्ची वाली कबीता-गीत पल कुथ लीखेंगे ।

शुभम सचदेव ने कहा…

अंतल मैनें कविता शुन ली है , अब मिल्ती बाल कब दोगे..... शुभम सचदेव

सीमा सचदेव ने कहा…

अमर अंतल मिल्ती बाल तो समीर अंतल देंगे , आपको दो-दो मिल्ती बाल...:) , आज ही खरीद लेना और बिल समीर अंकल को कोरियर करवा देना ...:)

अक्षिता (पाखी) ने कहा…

चिड़िया की चूं-चूं प्यारी लगी ...और मेरा मिल्की-बार भी पक्का...

____________________
'पाखी की दुनिया' में इस बार माउन्ट हैरियट की सैर पर.

Shekhar Kumawat ने कहा…

bahut khub


shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

Aman ने कहा…

समीर अंकल आपकी कविता पढ़ कर मज़ा आ गया ..... हमारे घर में भी रोज सुबह शाम चूँ चूँ करती चिड़िया है ...उसने अपना एक घोंसला भी बनाया है उसमे उसके दो बच्चे भी रहते है....
काश की हम भी चिड़िया होते
आपके घर झट उड़ के आ जाते
चाहे मंदिर चाहे मस्जिद चाहे हो गुरूद्वारे
घूम घूमकर सब जगहों पर धूम मचाते

anjana ने कहा…

बडा ही प्यारा बाल गीत ।बधाई..

कुमार राधारमण ने कहा…

चिड़ियों का जिक्र होते ही,शहंशाह आलम जी की एक कविता याद आती हैः
"चिड़ियों का हौसला देखिए
वो चाहे जहाँ आ-जा सकती है
सवर्णों के कुओं पर पानी पीती है
हरिजनों के घरों के दाने चुगती है
हम ऐसा कुछ भी तो नहीं कर सकते
ऐसा करने के लिए हममें
चिड़ियों-सा हौसला चहिए।"

डा. अमर कुमार ने कहा…


नेंईं नेंईं, अम मिल्ति बार नेंईं लेंदें ।
अमतो अबछे सबी त्यूददे को उनती कोबीता थुनना है ।

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

बढ़िया कविता!
इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता
इसकी ध्वन्यात्मकता है!

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बढिया !!

Manju Gupta ने कहा…

चिड़ियाओं के माध्यम से जातीय सदभाव का अति सुंदर संदेश बड़ों -छोटों
को मिला .क्या बात -क्या बात बेमिसाल .

सीमा सचदेव ने कहा…

Aar uncle aap to nai na deemand karte a , ab mai kya karu ...:(

माधव ने कहा…

अच्छा है

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत आभार सबका...सीमा जी, सबको हमारी तरफ से मिल्की बार दिजिये. :)

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने कहा…

जीवंत रचना...साधुवाद.

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

उपयोगी होने के कारण
चर्चा मंच पर

झिलमिल करते सजे सितारे!

शीर्षक के अंतर्गत
इस पोस्ट की चर्चा की गई है!

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