बच्चों, बहुत खोजबीन के बाद, अचपन जी ने नन्हा मन पर उड़न तश्तरी उतारने में सफलता पाई ! देखा ? तो.. सी-बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दो !

पढ़ने वाले भैय्या, अँकल जी और आँटी जी,
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !
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आप सब को नन्हें मन का नमस्ते.. प्रणाम.. सत श्री अकाल !

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मेरे लिये कुछ लिख भेजिये, ना ..प्लीज़ !

प्यारे बच्चो , आपको और सभी भारतवासियों को आजादी की हार्दिक बधाई और शुभ-काम्नायें । स्वतंत्रता दिवस पर पढिए देश भक्ति की रचनाएं यहां ......

30 जुलाई 2010

कुछ बूदें ज़िन्दगी की..

नमस्कार बच्चों, ना ना डरो नहीं मैं तुम्हें पोलियो की दवा पिलाने नहीं आया हूँ ।   मैं तो पानी बचाने के खातिर तुम्हारे लिये आज यह कुछ बूँदें लाया हूँ । हँस पड़े ना... भला  दो बूँद  पानी भी कुछ होता ? अगर तुमको यह याद होता कि बूँद बूँद से भरता सागर.. तो शायद न हँसते । हँसो.. हँसो, जरा और हँसो.. मन में तो यही आया होगा, आजकल हर जगह से बाढ़ आने की खबर आ रहीं है, समुद्र में पहले से ही इतना पानी भरा हुआ है.. फिर अचपन जी, कुछ बूँद ज़िन्दगी की क्यों लायें हैं ?
बताइये भला, इन बुद्धुओं को कौन समझाये ? जैसे अपने चारों तरफ़ वायुमँडल में हवा है, लेकिन यह सभी हवा हमारे साँस लेने के लिये नहीं है, हमें तो प्रदूषण-मुक्त शुद्ध हवा चाहिये होता है, न ?
ठीक है.. फिर इसी तरह हमें अपने इस्तेमाल के लिये भी साफ़ पानी चाहिये होता है । ठीक है.. क्योंकि अगर हम इस्तेमाल न करने लायक पानी, जबरदस्ती अपने उपयोग में लायेंगे.. तो बीमार होंगे वह अलग, और भी बहुत कुछ हो सकता है, जो हमें कई सालों बाद पता लगेगा ।
तुम लोगों में किस किस ने वाटर-साइकिल पढ़ रखा है ? अरे वही.. बादल से बरसात, बरसात से भूगर्भ के पानी का सँचय, इस सँचित पानी  को जमीन के नीचे से बाहर लाकर हम उपयोग करते हैं, घूम फिर कर यही पानी बादलों में परिवर्तित होता है.. और फिर.. यह चक्र ऎसे ही चलता रहता है ।
हम पानी की बरबादी न करें, तो कितना अच्छा हो । अरे हाँ, आपके पापा को मीटर से आने वाले पानी का बिल भी तो देना होता होगा, न ? वह भी कम हो जायेगा । अब पूछो कि इसे बचायें कैसें ? मैं एक चार्ट बनाया है.. इसे देखो, समझो और हो सके तो प्रिंट करके घर में किसी अच्छी जगह लगा दो ।

crowPecking

क्या किया कैसे किया खर्च   बरबादी यह करते खर्च होता तो    बचाया
दाँत ब्रश किया वाशबेसिन  के नल से, केवल 5 मिनट कुल 45 लीटर एक मग या टम्बलर लेते 0.5 लीटर 44.5 लीटर तक
हाथ धोये वाश बेसिन के नल को 2 मिनट खुला रखा 18 लीटर साबुन मलते समय टॊंटी बन्द रखते 2 लीटर 16 लीटर तक
पापा ने शेव किया 2 मिनट टोंती खुली छोड़ी 18 लीटर अगर शेविंग कप होता 2 लीटर 16 लीटर तक
शॉवर लिया साबुन लगाते समय बन्द न किया 90 लीटर बदन भिगाने के बाद इसे बन्द करके साबुन लगाते 20 लीटर 70 लीटर तक
टॉयलेट फ़्लॅश किया पुराने फ़ैशन का बड़ा सिस्टर्न है 13.5 लीटर नये चलन का डॅबल सिस्टम फ़्लॅश होता 4.5 से 8 लीटर 9 से 4.5  लीटर तक
पौधों को सींचा सीधे पाइप से 15 मिनट को 120 लीटर छोटी बाल्टी या बड़ा मग लेते 5 से 8लीटर 110 से 115 लीटर तक
मम्मी ने फ़र्श धोया सीधे मोटे पाइप से 10 मिनट 200 लीटर यदि पोंछा और बाल्टी होती 18 से 20 लीटर 180 लीटर तक
कार धोया मोटे पाइप से 10 मिनट 400 लीटर यह 3बाल्टी पानी में हो जाता 18 से 20 लीटर 380 लीटर तक

यह सब तो बाद की बातें हैं, जरा सोचो कि अगर आपके घर की एक भी टोंटी बूँद बूँद करके टपक रही हो, तो कितना नुकसान होगा.. 90  से 95 लीटर प्रतिदिन !

जी हाँ, भाई साहब, .. अब समझ में आया कि यदि बूँद बूँद से भरता सागर तो बूँद बूँद से खाली होती टँकी.. और खाली होती है पापा की ज़ेब ! तभी तो कहा है.

.रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून

पानी गये न उबरे मोती मानस चून !!

न जाने उन्होंने कितने साल पहले यह कहा होगा, और हम हैं कि आज तक इसका महत्व समझे  ही नहीं । तुम समझोगे ना ?

फिर मिलते हैं, अगली 30 तारीख को… सीमा दीदी को और अन्य सभी लेखक लेखिकाओं को मेरा नमस्ते कहना । – अचपन जी

4 जन ने कहा है:

sheetal ने कहा…

bahut accha likha aapne, aapne jo upar chart banaya hain wo kabile taarif hain. sach main hume is anmol wastu ko is tarah jaaya nahi karna chahiye.
pehli baar aapke blog par aayi hun accha laga.

डॉ. हरदीप सँधू ने कहा…

Acchee baat hai...
mai too aap kee baat zalool manugee...
ab se panee waste nahee kaloongee!!!

बेनामी ने कहा…

अमर अंकल आप्ने इतनी सुन्दर जान्कारी दी , मुझे इससे बहुत कुछ सीख्ने को मिला । पता है मेरे स्कूल मे इस महीने का थीम भी था--वाटर , मम्मी नें मुझे पानी से सम्बन्धित बहुत सारी जानकाई भी दी थी , पानी की सम्भाल हम कैसे कर सकते है यह भी बताया था ,पर आप्का बनाया चार्ट तो मैन हमेशा पने पास रखुन्गा और अपने दोस्तों को भी दिखाऊंगा । आपका बहुत -२ धन्यवाद .....शुभम सचदेव

सीमा सचदेव ने कहा…

नमस्कार डा. अमर ,
कैसे हैं आप ? आपको पढना हमेशा सुखद और ग्यान्वर्धक रहा है । इस बार आपने जो बहुमूल्य जानकारी दी है वह बच्चों के लिए ही नहीं बडों को भी इससे सीख मिलती है । आपसे ऐसी ही नई और बहुमूल्य जानकारी की हम इंतजार करंगे । धन्यवाद ....सीमा सचदेव

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