बालगीत: अनुष्का संजीव 'सलिल'
बालगीत:
अनुष्का
संजीव 'सलिल'
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(लोस एंजिल्स अमेरिका से अपनी मम्मी रानी विशाल के साथ ददिहाल-ननिहाल भारत आई नन्हीं अनुष्का के लिए है यह गीत)
लो भारत में आई अनुष्का.
सबके दिल पर छाई अनुष्का.
यह परियों की शहजादी है.
खुशियाँ अनगिन लाई अनुष्का..
है नन्हीं, हौसले बड़े हैं.
कलियों सी मुस्काई अनुष्का..
दादा-दादी, नाना-नानी,
मामा के मन भाई अनुष्का..
सबसे मिल मम्मी क्यों रोती?
सोचे, समझ न पाई अनुष्का..
सात समंदर दूरी कितनी?
कर फैला मुस्काई अनुष्का..
जो मन भाये वही करेगी.
रोको, हुई रुलाई अनुष्का..
मम्मी दौड़ी, पकड़- चुपाऊँ.
हाथ न लेकिन आई अनुष्का..
ठेंगा दिखा दूर से हँस दी .
भरमा मन भरमाई अनुष्का..
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6 जन ने कहा है:
अनुष्का बहुत प्यारी है.... उसके लिए कविता भी कितनी सुंदर लिखी है....आपने
badhiyaa
नन्ही अनुष्का को ढेर सारा प्यार!
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सुन्दर बालगीत की रचना की है आचार्य जी ने!
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तभी तो इसकी चर्चा यहाँ की है-
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/10/26.html
nicely written in a rythemic way.. like it.
बहुत अच्छा तोहफा दिया सलिल जी ने अनुष्का को। स्वागत है उसका यहाँ नानी के घर। उसे आशीर्वाद और शुभकामनायें। आदि तुम कैसे हो? तुम्हें भी बहुत बहुत आशीर्वाद।
आदरणीय नानाजी,
सादर प्रणाम
आपके द्वारा रची गई यह सुन्दर रचना मेरे लिए बहुत ही मनोहारी उपहार है ....आपके इस प्यार को मैं हमेशा अपने पास सहेज कर रखूंगी ....आभार !
आपकी प्यारी
अनुष्का
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