
आओ बच्चो तुम्हे दिखाऊँ
इक सरकस का खेल
जिसे देखकर बढ जाता है
इक दूजे से मेल
झूल-झूल कर झूला झूले
भालू बड़ी शान से
गाड़ी बन्दर मामा चलाएँ
हाथी खेले कमान से
करतब करती नाच दिखाती

ऊँचे झूले पर चढ जाती
कूद के लडकियाँ खेल दिखाएँ
देख के सारे ताली बजाएँ
अब देखो वह जोकर आया
इक पहिए की साइकिल लाया
तरह्-तरह के मुँह बनाकर
उसने सबको खूब हँसाया
गेंद लिए फिर हाथी आया
भालू ने मोटर-साइकिल चलाया

अब आए पिंजरों मे शेर
खडे है उनको सारे घेर
जब शेरो के पिंजरे खोले
शेर तो दो पैरो पे डोले
लम्बी एक बनाकर रेल
खत्म हुआ सरकस का खेल
बहुत ही बढ़िया
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http://prajapativinay.blogspot.com/
बहुत सुंदर।
जवाब देंहटाएंbachchon ke liye likhna
जवाब देंहटाएंaasan kam nahi hai.. bada kathin hai.
badhai or sadhuwaad ki aap bachchhon ke liye likh rahi hen.
likhti rahen...meri shubhkamnayen.
regards
बहुत सुंदर ऐसे ही लिखते रहिए
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुंदर मै यहां उन बच्चो को यह लिंक भेज दुगा जो अभी छोटे है, ता कि वो हिन्दी से बंध सके...
जवाब देंहटाएंखत्म हुआ सरकस का खेल, चलो बच्चो अब ताली बजायो.
धन्यवाद