मुझे प्यारी मेरी माँ
दुनिया से है न्यारी माँ

प्यार से सुबह जगाती है
मीठा दूध पिलाती है
पहना के मुझे सुन्दर कपडे
स्कूल छोड के आती है
अच्छे अच्छे खाने बनाती
अपने हाथ से मुझे खिलाती
रोज खेलती मेरे साथ
चलती मेरा पकड के हाथ
प्यार से मुझको गले लगाए
मीठी-मीठी लोरी सुनाए
पापा को जब गुस्सा आए
तो माँ आकर मुझे बचाए
कभी -कभी माँ जब छुप जाए
तो मुझे रोना आता है
माँ का इक पल भी न दिखना
मुझको जरा न भाता है
अच्छी टीचर मेरी माँ
मेरी दोस्त मेरी माँ
प्यारी प्यारी मेरी माँ
दुनिया से है न्यारी माँ
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इस कविता को आप सबकी प्यारी मीनू आन्टी ने आवाज़ भी दी है। उसे भी सुनिए और अपनी-अपनी माँ को भी सुनाइए-
एक बालमन से जितना बेहतर माँ के लिए अभिव्यक्त किया जा सकता है...उतना आपकी यह बाल कविता करती है...सुन्दर प्रस्तुति...
जवाब देंहटाएंमाँ को नमन !!
आलोक सिंह "साहिल"
बालमन रचना सुन्दर रचना।
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